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रोसड़ा में 50 साल पुरानी महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़ी गई, आक्रोशित लोगों ने हाईवे जाम कर जताया विरोध

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समस्तीपुर जिले के रोसड़ा में महात्मा गांधी की 50 वर्ष पुरानी आदमकद प्रतिमा को असामाजिक तत्वों ने रात में क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के विरोध में लोगों ने समस्तीपुर-बेगूसराय स्टेट हाईवे जाम कर दिया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

रोसड़ा/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के रोसड़ा में बुधवार की रात घटी एक शर्मनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की करीब 50 वर्ष पुरानी आदमकद प्रतिमा को अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिए जाने के बाद गुरुवार सुबह इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। यह प्रतिमा रोसड़ा रेलवे गुमटी के निकट स्थित गांधी चौक पर वर्षों से स्थापित थी और स्थानीय लोगों के लिए केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक स्मृति का प्रतीक मानी जाती रही है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग जुट गए और विरोध स्वरूप समस्तीपुर–बेगूसराय स्टेट हाईवे-55 को जाम कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई सामान्य तोड़फोड़ नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के नाम और प्रतीक को सार्वजनिक स्मृति से मिटाने की एक सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। जिस तरीके से रात के अंधेरे में अहिंसा, सत्य और शांति के प्रतीक महात्मा गांधी की प्रतिमा को निशाना बनाया गया, उसने लोगों के मन में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि यह सिर्फ शरारती तत्वों की करतूत होती, तो घटना का स्वरूप इतना संगठित और योजनाबद्ध नहीं दिखता। कई लोगों ने आशंका जताई कि प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने में भारी मशीन या जेसीबी जैसे उपकरण का इस्तेमाल भी किया गया हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन घटनास्थल की स्थिति ने इस आशंका को हवा दी है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रात के समय इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई और पुलिस गश्ती टीम को इसकी भनक तक नहीं लगी? स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जिस इलाके को शहर की पहचान माना जाता है, वहां सुरक्षा और निगरानी की ऐसी चूक कैसे हो सकती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गश्ती व्यवस्था सक्रिय रहती या आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जाती, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले में सिर्फ असामाजिक तत्वों की भूमिका ही नहीं, बल्कि स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की सतर्कता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि यह प्रतिमा करीब पचास वर्ष पूर्व अर्जुन सिंह द्वारा स्थापित कराई गई थी। उसी समय से इस स्थान को ‘गांधी चौक’ के नाम से पहचाना जाने लगा। वर्षों से यह स्थल रोसड़ा के सामाजिक, राजनीतिक और सार्वजनिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में इस प्रतिमा को नुकसान पहुंचाना सिर्फ एक मूर्ति को तोड़ना नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। यही कारण है कि इस घटना ने आम लोगों के भीतर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।

गुरुवार सुबह जैसे ही लोगों को घटना की जानकारी मिली, इलाके में तनाव का माहौल बन गया। आक्रोशित लोगों ने समस्तीपुर-बेगूसराय स्टेट हाईवे-55 पर उतरकर जाम लगा दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दोषियों की जल्द पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और क्षतिग्रस्त प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित किया जाए। लोगों का कहना था कि यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो शहर में सामाजिक सौहार्द और ऐतिहासिक प्रतीकों की सुरक्षा दोनों पर खतरा बढ़ेगा।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन भी हरकत में आया। रोसड़ा के एसडीओ और एसडीपीओ मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने लोगों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। प्रशासन ने घटनास्थल का निरीक्षण कर यह जानने की कोशिश शुरू कर दी है कि प्रतिमा को किस तरह नुकसान पहुंचाया गया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका हो सकती है। संभावना जताई जा रही है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय गतिविधियों की मदद से पुलिस जल्द कुछ सुराग जुटाने की कोशिश करेगी।

फिलहाल शहर में इस घटना को लेकर गहरा रोष, असहजता और बेचैनी का माहौल है। लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आखिर रोसड़ा में ऐसा क्या माहौल बन रहा है, जहां शहर की पहचान मानी जाने वाली सार्वजनिक प्रतिमाएं भी सुरक्षित नहीं रह गईं। महात्मा गांधी, जिनका नाम सत्य, अहिंसा और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, उनकी प्रतिमा को रात के अंधेरे में तोड़ना लोगों को केवल आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक सोच पर हमला भी लग रहा है।

इस घटना ने रोसड़ा के सामाजिक ताने-बाने को भी झकझोर दिया है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह समाज के सामने भी एक सवाल है कि क्या हम अपने सार्वजनिक प्रतीकों, अपने इतिहास और अपने नैतिक मूल्यों की रक्षा कर पा रहे हैं या नहीं। गांधी चौक पर जो हुआ, उसने रोसड़ा के लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शहर की आत्मा कही जाने वाली जगहें अगर असुरक्षित हो जाएं, तो यह सिर्फ एक मूर्ति की क्षति नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना की चोट बन जाती है।

अब लोगों की निगाह प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। शहरवासी यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस शर्मनाक कृत्य के पीछे कौन लोग हैं, उनकी मंशा क्या थी और उन्हें कब तक कानून के दायरे में लाया जाएगा। साथ ही, आम लोगों की यह भी मांग है कि गांधी चौक की गरिमा को जल्द बहाल किया जाए और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

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